Sunday, July 18, 2021

मनमोहन सिंह का पाप, मोदींजी के सिर!! - हिंदी

आज पेट्रोल पंपपर जब मुझे 108 रुपये देकर पेट्रोल डालना पड़ा तब मन में बहुत गुस्सा आया और मन में खयाल आया की, कहीं मैंने इस सरकार को चुनकर गलती तो नहीं की? पर इसके साथ ही और एक ख्याल मेरे मन में आया कि जब मोदीजी  जनता का जीवन सुखी करने के लिए कई सारी योजनाएं चलाते हैं, तो फिर पेट्रोल और पेट्रोलियम पदार्थ जो आम आदमी के रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा है | उसके लिए वह कुछ भी क्यों नहीं करते हैं ? क्या मोदी को यह समझ में नहीं आता है कि, जनता उनको  रोज भला-बुरा कहती है?

और इसीलिए सच जानने के लिए मैंने पढ़ना शुरू किया और मेरे मन की सारी आशंकाए दूर हो गई |  मेरे जैसे कईयों के मन में यह आशंकाए हो सकती है | इसलिए मुझे मिली हुई जानकारी मैं आप सबके सामने रख रहा हूं।

राज्य और केंद्र का टैक्स:
कुछ दिनों पहले जब पेट्रोल की कीमत 100 रुपये थी तब उस पर करीब 60 %  टैक्स हम राज्य और केंद्र सरकार को दे रहे थे | इसी कारण 2020-21 के वित्तीय वर्ष में केंद्र सरकार के कोष में  3.72 लाख करोड़ रुपया जमा हुआ और राज्य सरकारने 2.3 लाख करोड रुपए जमा किए |  केंद्र सरकार को इस देश की, अर्थव्यवस्था चलानी है | साथ ही उनको मुफ्त में लोगो को टिका लगवाना, कोरोना से बचाव के लिए अच्छी आरोग्य सुविधाओं का निर्माण करना, नए रास्तों का निर्माण, संरक्षण व्यवस्था में सुधार, जन धन योजना, रेलवे का विकास और इसके जैसी कई सारी विकास के कामों में से उनका काम जमीन पर दिखता है | जिससे हमारे टैक्स का दिया हुआ पैसा यूपीए के काल के दौरान जैसा भ्रष्टाचार में जाता था वैसे न जाते हुए आम इंसान का जीवन आसान करने के लिए लगता है इसे देख कर अच्छा लगा और साथ ही केंद्र को घर के बुजुर्ग व्यक्ति की तरह सभी राज्यों को संभालना होता है, लेकिन राज्य को सिर्फ अपना खुद का एक राज्य ही चलाना होता है | फिर भी मुझे समझ में नहीं आता है कि राज्य सरकार के द्वारा जमा किया हुआ टैक्स का पैसा कहा जाता है? 



केंद्र को पूरा देश चलाना है और उसके पास राज्यों की तुलना में सिर्फ डेढ़ लाख करोड रुपए ही ज्यादा संकलित होते है | फिर भी देश के दादाजी होने के नाते सभी राज्यों को सभी सुविधाएं पहुंचाना यह केंद्र का काम है, इसे हमें भूलना नहीं होगा।
पेट्रोलियम पदार्थों के ऊपर लगाए जाने वाला वेट (VAT)  टैक्स यह कांग्रेस के राज्य राजस्थान में सबसे ज्यादा लगाया जाता है जिस वजह से वहां की कीमत पूरे भारत में सबसे ज्यादा है | जिस बढ़ते हुए दामों के विरोध में कांग्रेस आंदोलन करती है, वहीं कांग्रेस खुद की सत्ता होने के बावजूद उस राज्य का टैक्स कम क्यों नहीं करती है? इससे आप समझ सकते हैं कि उन्हें सिर्फ राजनीति करनी है।

मोदी से मनमोहन अच्छे थे: ? :

आजकल कई लोगों को ऐसा लगता है की, मोदीजी से अच्छा मनमोहन सरकार का कार्यकाल अच्छा था|(शायद यह कांग्रेस के रोज निकलनेवाले आंदोलनों की वजह से लग रहा है) पर सत्य परिस्थिति उसके उलट है | क्योंकि मनमोहनजी के कार्यकाल के दौरान पूरे विश्व में क्रूड ऑयल की कीमत बढ़ने के बावजूद भी सरकार के द्वारा उस कीमत को नियंत्रित करने की वजह से भारत में पेट्रोल डीजल सस्ता मिलता था | जिससे आम आदमी को उसकी चोट नहीं लगती थी।
पर सरकार पेट्रोल-डीजल के दामों को नियंत्रित करती थी, इसका मतलब क्या है ? यानी कि वह क्या करती थी? यह आपको समझना पड़ेगा | क्योंकि इसी में असलियत छुपी हुई है और इसीसे आप समझ पाएंगे कि, कांग्रेस के अर्थशास्त्री मनमोहनसिंहजी ने आपको और हमें किस तरह से चुना लगाया है और किस वजह से आज आप और मैं इसके फल भुगत रहे हैं, यह आपके ध्यान में आएगा।
सन 2010 तक पूरे विश्व में क्रूड ऑयल की कीमत बढ़ने के बावजूद भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमत पर नियंत्रण रखने के लिए भारत सरकार ऑयल कंपनियों को ऑयल बॉन्ड जारी करती थी।

ऑयल बॉन्ड मतलब क्या ?:
रिजर्व बैंक के नियम के अनुसार सरकार कंपनियों को स्पेशल बॉन्ड जारी कर सकती है | इसका अर्थ यह है कि नगद रकम देने के बजाएं किसी कंपनी को बॉन्ड के रूप में भी सरकार पेमेंट कर सकती है | इससे सरकार को 2 फायदे होते हैं | एक, उनको अपने सरकार की तिजोरी में से नगद रकम नहीं देनी पड़ती और दूसरा, राजकोषीय घाटा भी नियंत्रण में दिखता है | मतलब सरकार की आय और व्यय का खाताबुक ऐसी दोनों बातें एकदम स्वच्छ दिखती है | इसका बड़ा राजनैतिक  लाभ भी होता है | वह लाभ ऐसा कि, सरकार की आज की जरूरत पैसे खर्च किये बिना पूरी हो जाती है और सरकार आज है लेकिन कल रहेगी कि नहीं ? यह पता नहीं होता है, तो जब इस ऑयल बॉन्ड की रकम देने का समय आएगा उस वक्त जो सरकार रहेगी उसको इसके पैसे देने पड़ते है | जो आज हम दे रहे हैं।
तत्कालीन सरकार ने बड़े पैमाने पर उस वक्त ऑयल बॉन्ड को जारी करना शुरू किया | उन्होंने ऑयल मार्केट कंपनियों को ओएमसी बॉन्ड के रूप में भुगतान किया था | यह बॉन्ड तय अवधि के लिए जारी किए गए थे | ऑयल कंपनियों को तब स्वतंत्रता दी गई कि, इस अवधि के दौरान वह इन बॉन्ड को बैंक, इंश्योरेंस कंपनियों को बेच सकते हैं | इस वजह से उनको अगर जरूरत पड़ती है तो उनकी आर्थिक परेशानियों को छुटकारा मिल सकता था| यह वही समय था जब विश्व के बाजार में तेल का भाव कुछ भी रहे लेकिन भारत में आम आदमी को सस्ता तेल मिलता था | क्योंकि सरकार इस पर सब्सिडी दे रही थी, ऑयल बॉन्ड के जरिए।

यूपीए के काल में कितने रुपए के ऑयल बॉन्ड दिए गए ? : 

सन 2005 से 2010 कार्यकाल में 1.44 लाख करोड रुपए के ऑयल बॉन्ड जारी किए गए | जो अभी मोदी सरकार के कार्यकाल में भुगतान करने पड़ रहे हैं।



सन 2014 में जब मोदी सरकार सत्ता में आयी तब दो बॉन्ड जिनकी एक की कीमत 1750 करोड रुपए थी ऐसे कुल 3500 करोड रुपए 2015 में मोदी सरकार ने बॉन्ड के रीपेयमेंट के रूप में भरे हुए हैं |  यह जानकारी राज्यसभा में भी बताई गई थी और 2019 के बजट में इस कर्ज का उल्लेख किया गया है, यह आप देख सकते हैं | 
2019 में मोदी सरकार फिर से सत्ता में आए तब कर्ज 1,34,423 करोड़ रुपए था जो अभी 1,30,923.17 करोड रुपए पर आ गया है | इससे स्पष्ट होता है कि, मोदी सरकार ने  3500 करोड़ रुपए मुद्दल और ब्याज के रूप में भुगतान किए हुए हैं।



साथ ही इससे हमें और एक बात ध्यान में आती है कि हमें 1,30,923.17 करोड़ रुपए कर्जा भरना अभी भी बाकी है।



बजट के दस्तावेजों के अनुसार 41,150 करोड़ रुपए के बॉन्ड सन 2019 से 2024 के दरम्यान पूरे हो रहे हैं | इस वजह से अब उनका भुगतान हमको करना पड़ेगा | उसमें से 2021-22 इस वित्तीय वर्ष में 20000 करोड रुपए बॉन्ड का रीपेयमेंट हमें करना है ,जो ब्याज और मुद्दल के रूप में है | यह बॉन्ड यूपीए 2005-2010  इस कार्यकाल में दिए गए थे।



पेट्रोल बॉन्ड जारी करना कब बंद हुआ?
सन 2008 में विश्व में महामंदी आई और इस वजह से आयल मार्केट कंपनियों की हालत खस्ता हो गई | कंपनियां सरकार की तरफ गई और उन्होंने अपने रीपेयमेंट की बात रखी | क्योंकि अगर ऐसा नहीं किया गया तो उनकी कंपनिया बंद पड़ जाएगी, इस बात को भी उन्होंने सरकार के सामने रखा | पर उस वक्त सरकारी तेल कंपनियां भी परेशानी में आ गई थी | इस वजह से सरकार जाग खड़ी हुई और 2010 में आयल बॉन्ड जारी करके पेमेंट देने की प्रक्रिया उन्होंने बंद करके फिर से नगद भुगतान के लेनदेन की शुरुआत की और बड़ी चालाकी से अब जब उन पर सब्सिडी देने का भार आनेवाला था, तो उन्होंने पेट्रोल की कीमत के ऊपर का सरकारी नियंत्रण निकाल लिया।



मोदी सरकार आने के बाद एक बार भी आयल बॉन्ड  जारी नहीं किया गया यह भी बताना मुझे यहापर आवश्यक लग रहा है।

पेट्रोल डीजल सरकारी नियंत्रण के बाहर:
अब आयल बॉन्ड  का नाटक बंद हो गया था | जिस वजह से आज दिए गए सब्सिडी के पैसे आज की सरकार को देने पडने वाले थे | इसी वजह से वह भार अपने ऊपर ना आए इसलिए सन 2010 में सरकार ने पेट्रोल के ऊपर का अपना नियंत्रण निकाल लिया | इसका मतलब यह था कि, अब बाजार में जो कच्चे तेल का भाव होगा उस हिसाब से भारत में भी पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी या कमी होने वाली थी | अक्टूबर 2014 में डीजल के बारे में भी यही निर्णय लागू किया गया और यह करते वक्त उन्होंने फिर एक बार चालाकी की और पेट्रोल-डीजल के भाव को हर 15 दिन में बदलने का निर्णय रखा | जिससे ऑयल कंपनियों को फायदा होने लगा और जनता के हाथ में नुकसान आने लगा | क्योंकि 14 दिन में अगर विश्व के तेल के भावो में कमी आई होगी तो उसका फायदा ग्राहक को नहीं मिलता था मगर 15 दिन तक बाजार में कीमत बढ़ गई होगी तो उसका नुकसान ग्राहक को जरूर होता था|


2017 में मोदी सरकारने 16 जून 2017 से इस निर्णय में बदलाव किया और हर दिन सुबह 6:00 बजे तेल के भाव की समीक्षा करके नए भाव दिए जाने का निर्णय जारी किया | इस वजह से हर दिन जो विश्व बाजार में तेल के भाव में बदलाव होगा उसके हिसाब से भारत में कीमत तय की जाने लगी | जिसका फायदा या नुकसान दोनों ही चीजें जनता को मिलने लगी जो 15 दिन में होनेवाली कीमत के बदलाव में नहीं मिलती थी।




जाते-जाते इतना ही कहूंगा कि भारत में ८५%  पेट्रोलियम पदार्थों की आयात करनी पड़ती है और इस आयात में कमी लाने के लिए कई सारी उपाययोजना की जा रही है | जैसे, इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देना, इथेनोल का प्रमाण पेट्रोल में बढ़ाना, साथ ही भारत में नए पेट्रोलियम खदानों की खोज करना,  ऐसे कई सारे मार्गो का अवलम्ब करके भारत को आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रयास जारी है | तब तक इस परेशानी हम सबको झेलना ही पड़ेगा | पर दोष देते वक्त वह किसका दोष है यह भी हमें दिमाग में रखना होगा | पेट्रोल-डीजल यह मानव जीवन  का रोजमर्रा का हिस्सा है और उसमें होनेवाली दामों की बढ़ोतरी की वजह से आम आदमी दुखी है,  यह मोदीजी को भी दिखता होगा, इसमें कोई दो राय नहीं है | साथ ही इन दामों की बढ़ोतरी की वजह से हर दिन मोदीजी के नाम से विरोधी आंदोलन-मोर्चा निकालकर हल्लागुल्ला कर रहे हैं | लेकिन अर्थशास्त्री मनमोहन सिंहने  किया हुआ पाप जनता की जेब ढीली कर रहा है और यह पाप मोदी जी के सर पर मढ़ा जा रहा है, यह मोदीजी को समझता नहीं होगा ? और इसका राजनैतिक नुकसान उन्हें झेलना पड़ेगा, क्या यह भी मोदीजी को नहीं समझता होगा ? मुझे तो यही लगता है की,  यह सब मोदीजी  को भी समझता होगा | पर मोदीजी की एक खासियत है कि, वह बार-बार फालतू की बातों पर अपना समय बर्बाद नहीं करते हैं | वह विरोधियों को बड़े पैमाने पर उनकी जीत का भ्रम निर्माण करते हैं और फिर अचानक एक दिन आते हैं और उनके सभी दावों में से हवा निकाल कर जनता के सामने सत्य रखते है और जनता फिर से एक बार उन्होंने बताई हुई बातो को समझकर उनके पीछे मजबूती से खड़ी रहती है | अब मुझे बस यही देखना है कि, खुद मोदीजी कब आकर इस विषय पर बोलते हैं और विरोधियो की झूठे दावों में से हवा निकालते हैं | तब तक यह सच्ची जानकारी जनता तक पहुंचाना आपका और मेरा कर्तव्य है | जो हम सबको मिलकर करना है और मोदीजी को मजबूती से साथ देना है |

धन्यवाद!!

पवनWriting hand

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