Sunday, June 13, 2021

कोविशील्ड, कोवाक्सिन, स्पुतनिक-वी, भारत और विपक्ष !!!

भारत में चल रहे टीकाकरण अभियान में कुल 3 टीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है।

उनमें से दो स्वदेशी हैं और एक स्पुतनिक-वी रूस से आयात किया जाता है।

विरोधियों ने विदेशी टीकों को देश में अनुमति देने का आह्वान किया है ताकि लोगों को बेहतर टीके मिल सकें। लेकिन अब जब विदेशों से वैक्सीन भारत आई, तो ऐसा लगता है कि भारत के लोगों से  इसे बेहद ठंडी प्रतिक्रिया मिली है।

भारत में 12 जून तक तीनों टीकों की कुल 24.88 करोड़ डोज दी जा चुकी हैं।


14 मई, 2021 को भारत में स्पुतनिक-वी टीकाकरण कार्यक्रम शुरू होने के बाद से 22 दिनों में इनमें से केवल 24,716 लोगों ने स्पुतनिक-वी वैक्सीन लिया है।

भारत सरकार इस टीके की खरीद या वितरण नहीं करती है, जैसा कि कोवाक्सिन और कोविशील्ड के साथ करती है।

डॉ रेड्डीज लेबोरेटरी के माध्यम से  निजी अस्पताल के माध्यम से ही टीका लगाया जाता है। क्योंकि इसे -20 के तापमान पर स्टोर करना होता है। भारत में अब तक 32.10 लाख वैक्सीन का आयात किया जा चुका है और इस साल अगस्त से भारत में इस वैक्सीन का निर्माण किया जाएगा।  लगभग 850 मिलियन खुराक का उत्पादन करने का लक्ष्य है,  जिससे दुनिया भर में भेजी गयी स्पुतनिक -v वेक्सिन 65 से 70 प्रतिशत भारत में निर्मित  की हुयी होगी।

फिलहाल रूस ही हमें वैक्सीन भेज रहा है।



इन तीन टीकों की प्रभावशीलता:

एक और बात यह है कि, इन तीनों टीकों की प्रभावशीलता में बहुत अधिक अंतर नहीं है।

स्पुतनिक को कोविड - 19 के खिलाफ 91.6% प्रभावी पाया गया, जबकि कोवाक्सिन को 78 से 81% और कोविशील्ड को 70% से अधिक और एक सप्ताह से अधिक देर से लेने पर 90% तक पाया गया।




कीमत:

वर्तमान में भारत सरकार सभी नागरिकों को कोविशील्ड और कोवासीन मुफ्त में उपलब्ध करा रही है और सरकार ने उन लोगों के लिए कीमत तय की है, जो निजी अस्पताल से  ही टीका लगवाना चाहते हैं।

कोविशील्ड - 780 प्रति खुराक,

कोवासिन - 1410

स्पुतनिक वी - 1145

यह देखते हुए कि, स्पुतनिक-वी वर्तमान में भारत में सबसे सस्ता टीका है, ऐसा क्यों है कि, लोग इसे लेने  के लिए कम इच्छुक हैं? इस पर विचार करने की जरूरत है।



इन तीन टीकों के नकारात्मक प्रभाव इस प्रकार हैं:

फरवरी 2021 में द लैंसेट द्वारा प्रकाशित स्पुतनिक-वी के एक अध्ययन के अनुसार-

सरदर्द

थकान

इंजेक्शन स्थल पर दर्द

बुखार के लक्षण।

कोवाक्सिन की फैक्ट शीट के अनुसार -

इंजेक्शन स्थल पर दर्द

लाली और सूजन

बुखार

ठंडी या गर्मी लगना

शरीर में दर्द

मतली या उलटी

खुजली

सरदर्द

कोविशिल्ड  के दुष्प्रभाव लगभग कोवासिन के समान ही हैं। जिसमें,

इंजेक्शन स्थल पर दर्द

लालपन

कम -ज्यादा बुखार

घबराहट  महसूस होना

शरीर में दर्द




उपरोक्त सभी जानकारी के अध्ययन से पता चलता है कि, कोविड-19 के खिलाफ इन तीनों टीकों का प्रभाव, कम ज्यादा पैमाने में एक जैसा ही  है।यदि आकलन  किया जाए तो तीनों टीके लगभग एक समान हैं।

इसलिए, कम से कम इससे हम यह कह सकते है की,  भारतीय लोगों द्वारा  स्वदेशी टिका पसंद किया जा रहा है, या फिर वे विदेशी टीकों पर पैसा खर्च नहीं करना चाहते हैं।

तो अगर हमें  इस बारे में विस्तार से सोचना पड़ेगा की , तो राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्ष अभी भी 'फाइजर' और 'मोडेर्ना' जैसे टीकों की अनुमति देने की मांग क्यों कर रहा है, जिनकी कीमत वर्तमान में अमेरिका में 1423 रुपये प्रति खुराक है। भारत सरकार प्रति खुराक 150 रुपये देने के लिए जुलाई से बातचीत शुरू करेगी।




हालांकि, इसकी कीमत भारत में फिलहाल उपलब्ध 3 वैक्सीन से ज्यादा ही  होने की उम्मीद है। तो विपक्ष भारत में इन महंगे टीकों की मांग क्यों कर रहा है? , जबकि उन विदेशी टीकों की तुलना में जनता से स्वदेशी टिको को बेहतर प्रतिक्रिया मिल रही है? हमें यही सोचना चाहिए।

धन्यवाद !!!

पवन Writing hand



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