Friday, August 6, 2021

दारात नाही आड, म्हणे लावतो झाड!! (पेगासस-हिंदी)


राहुल गांधी सुप्रीम कोर्ट में पेगासस मामले में फिर एक बार मुंह के बल गिरे और नरेंद्र मोदी जनता के दरबार में चमक उठे हैं !!

पिछले कुछ दिनों से भारतीय जनता पार्टी के स्टार प्रचारक श्री राहुलजी गांधी और उनके नेतृत्व में कांग्रेस पार्टी तथा  अन्य विरोधी दलों ने भारत की संसद का काम ठप किया हुआ है | जिस वजह से आपके और मेरे द्वारा टैक्स के रूप में दिए गए पैसों का कचरा किया जा रहा है | जिस कारण से संसद का काम बंद किया जा रहा है वह कारण यह है कि,  'पेगासस नाम के स्पायवेअर द्वारा सरकार लोगों के ऊपर निगरानी रख रही है, ऐसा उनका आरोप है|

सरकार उनकी बात नहीं सुन रही है इसलिए और अपना नाम कोर्ट के कार्रवाई में ना आए इसलिए बड़ी चालाकी से उन्होंने हिंदू ग्रुप के डायरेक्टर श्री एन. राम के द्वारा सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई है और उनके वकील के रूप में कांग्रेस के नेता और जाने-माने वकील श्री कपिल सिब्बल ने जिम्मेदारी ली हुई है | यह वही कपिल सिब्बल साहब है जिन्होंने कांग्रेस के काल में सुप्रीम कोर्ट में एफिडेविट देकर बताया था कि, हिंदुओं के आराध्य भगवान श्रीराम 'काल्पनिक' है और साथ ही समय-समय पर अलग-अलग कारण लेकर उन्होंने राम मंदिर का केस 20 साल के आसपास कोर्ट में लंबित रखा था।

कल यानी कि दिनांक 5 अगस्त 2021 को सर्वोच्च न्यायालय में भारत के मुख्यन्यायाधीश श्री एन. व्ही. रमन्ना  और न्यायाधिश श्री सूर्यकांत के बेंच के सामने इस याचिका की सुनवाई हुई | सुनवाई के दौरान माननीय मुख्यन्यायाधीश साहब ने कौन से प्रश्न पूछे ? और उसके जवाब याचिकाकर्ता या उनके वकील की तरफ से क्या दिए गए? यह अगर हम देखेंगे तो हमें समझ में आएगा कि, पेगासस के नाम पर चलनेवाला यह दावा कितना खोकला है।

सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई का रिपोर्टिंग करने वाली पत्रकार नलिनी शर्मा के द्वारा किए गए रिपोर्टिंग के अनुसार,

माननीय मुख्यन्यायाधीश जी ने प्रश्न किया कि,  'आपने आपके एफिडेविट में बताया है कि,  भारतीय पत्रकारों के नाम  इस लिस्ट में दिए गए हैं | तो  आपको यह नाम कहासे मिले?  क्योंकि एफिडेविट में आप कहते हैं कि, कैलिफोर्निया कोर्ट ने उनके यहां पर दाखिल किए गए याचिका की सुनवाई के दरमियां फोन टैप किए गए भारतीय पत्रकारों का नाम लिया था, पर कैलिफोर्निया कोर्ट के द्वारा दिए गए निर्णय में  इसका कहीं भी जिक्र नहीं  है।'

इसके ऊपर याचिकाकर्ता के वकील श्री कपिल सिब्बलने जवाब दिया कि, 'इसका जिक्र कैलिफोर्निया कोर्ट के आदेश में नहीं है और आप सही कह रहे हैं।'

मुख्य न्यायाधीश कहा की,  फिर आपका ऊपर दिया गया 'वाक्य' गलत है।



इसी से आप को ध्यान में आ रहा होगा कि, एफिडेविट में झूट बोलकर याचिकाकर्ता ने दावा किया था कि, भारत में पेगासस का इस्तेमाल करके लोगों के  ऊपर नजर रखी जा रही है।

तो अब प्रश्न यह है कि यह दावा उन्होंने किस आधार पर किया था ? उसका जवाब निम्नलिखित है।

जवाब ऐसा है कि जिसका संदर्भ भारत में 'कैलिफोर्निया कोर्ट' कह कर बार-बार दिया जा रहा है वह आदेश  नॉर्दर्ण डिस्ट्रिक्ट ऑफ कैलिफोर्निया के जिला न्यायालय द्वारा दिया गया है | 2019 में जब पहली बार पेगासस के ऊपर  विवाद निर्माण हुआ था, उस समय कैलिफोर्निया के कोर्ट में व्हाट्सएपद्वारा याचिका दायर की गई थी कि, इस्राइली कंपनी एनएसओ जिन्होंने पेगासस का निर्माण किया है, इस कंपनी के द्वारा व्हाट्सएप का इस्तेमाल करके करीब 1400 मोबाइल फोन के अंदर मालवेयर छोड़ा गया है | जिससे उन फोन्स को हैक किया गया है और बाद में उन्हीं फोन्स का इस्तेमाल करके निगरानी रखी जा रही है।


पर इस याचिका को 16 जुलाई को  45 पन्नों का आदेश देकर कोर्ट ने खारिज कर दिया था | मतलब व्हाट्सएप के द्वारा किए गए दावे में तथ्य नहीं है, ऐसा निर्णय उस कोर्ट के द्वारा दिया गया था।
इस 45 पन्नों के आदेश में कहीं पर भी भारतीय पत्रकारों को पेगासस सॉफ्टवेयर के द्वारा लक्ष्य किया गया है ऐसा जिक्र नहीं था।

पिछले साल इस याचिका को खारिज करते समय कोर्ट ने निम्नलिखित शब्दों में अपना मत प्रदर्शित किया था।



तो फिर एन. राम की याचिका में यह संदर्भ कहां से आया ? जब उनके वकीलों को संपर्क किया गया तो उन्होंने बताया कि, इस याचिका में जो भारतीय पत्रकारों का संदर्भ दिया गया है वह 'द गार्डियन' द्वारा कैलिफोर्निया कोर्ट के आदेश पर प्रकाशित किये गए रिपोर्ट पर आधारित है | उस रिपोर्ट में 'द गार्डियन' ने यूके के सिटीजन लैब द्वारा किए गए संशोधन का हवाला दिया है | जिसमें दावा किया गया है कि, जिन 1400 लोगों का फोन हैक हुआ था उसमें कुछ भारतीय पत्रकार भी थे |

उस रिपोर्ट का कुछ अंश आप खुदही पढ़िए।



और इस प्रकार कल कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश श्री एन. वी. रमन्ना ने विरोधीओ को नंगा कर दिया और मीडिया यह सच कभी नहीं दिखाएगा और जनता के सामने यह सच आना चाहिए इसलिए यह कार्य हम कर रहे हैं।

जाते-जाते इतना ही कहूंगा कि भाजपा के स्टार प्रचारक राहुल गांधी हमेशा कुछ नया लेकर आते हैं | जैसे उन्होंने पिछली बार 'राफेल का भूत' लाया था| पर थोडे ही दिन में उसकी हवा निकल जाती है और वह मुंह की खाते हैं | लेकिन जब वह यह सब करते हैं तो वह अनजाने में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि को जनता के दरबार में और चकाचक करके जाते हैं | इसलिए राहुल गांधी का जितना भी धन्यवाद करेंगे उतना कम ही है | उनको शुभकामनाएं कि भविष्य में आप ऐसे ही विषय भारतीय जनता के सामने लेकर आते रहिए, जिस वजह से जनता की तरफ से मोदीजी को अपने आप ही बल मिलता रहेगा|

धन्यवाद!!
पवन!!
सन्दर्भ : बार एंड बेंचद्वारा दिनांक 05 अगस्त 2021 को किया गया फैक्ट चेक और सर्वोच्च न्यायालय की सुनवाई की रिपोर्टिंग|

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